
जो लौट के घर न आए…
राइफलमैन सुनील जंग महत (वीरगति प्राप्त)
राइफलमैन सुनील जंग महत की यूनिट 1/11 गढ़वाल राइफल्स को 09 मई 1999 को बटालिक सेक्टर में 70 इन्फैंट्री ब्रिगेड के अधीन तैनात किया गया था | बटालिक के आसपास का इलाका बेहद दुर्गम और खड़ी चढ़ाई वाली पहाड़ियों से घिरा हुआ था | गश्ती दल की रिपोर्टों से पुष्टि हो चुकी थी कि पाकिस्तानी घुसपैठियों ने जुबार और कुकरथांग चोटियों पर कब्जा कर लिया है। इसके परिणामस्वरूप सेना ने एक ऑपरेशनल योजना बनाई जिसमें दुश्मन को आगे बढ़ने और अन्य चोटियों पर कब्जा करने से रोकना शामिल था। इसके लिए यह जरुरी था कि पर्वत श्रृंखला पर स्थित महत्वपूर्ण चोटियों पर आगे बढकर कब्ज़ा जमाया जाए । इस योजना के तहत 1/11 गढ़वाल बटालियन को कुकरथांग पर्वतमाला पर स्थित प्वाइंट 4821 पर कब्जा करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी।
10 मई 1999 की सुबह 1/11 गढ़वाल राइफल्स की “डेल्टा” कंपनी की एक प्लाटून, कुकरथांग पहाड़ी की चोटी पर फंसी 3 पंजाब बटालियन की गश्ती टुकड़ी की सहायता के लिए चल पड़ी। राइफलमैन सुनील जंग और उनके साथियों ने दुश्मन की भारी गोलीबारी का सामना करते हुए 10 मई 1999 की सुबह कुकरथांग पहाड़ी पर चढ़कर 3 पंजाब बटालियन की गश्ती टुकड़ी से मिलाप कर लिया | 3 पंजाब बटालियन एक नाजुक स्थिति में थी क्योंकि दुश्मन कुकरथांग टॉप की आगे की चोटी से उन पर नजर रख रहा था ।
राइफलमैन सुनील जंग 1/11 गढ़वाल राइफल्स की उस प्लाटून में थे , जिसे 09 मई 1999 की दोपहर को यल्डोर से रवाना किया गया था। लेफ्टिनेंट आर एस रावत की कमान में राइफलमैन सुनील जंग प्लाटून के सिग्नल ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थे। 13 मई तक प्लाटून ने एक किलोमीटर से अधिक लंबी पहाड़ी श्रृंखला से दुश्मन को खोज खोजकर खदेड़ दिया । प्लाटून द्वारा ऑपरेशन शुरू किए हुए 05 दिन हो चुके थे और अब तक प्लाटून के पास गोला-बारूद, रेडियो सेट की बैटरियां और भोजन की कमी हो चुकी थी। लेफ्टिनेंट समीरन रॉय ‘ब्रावो’ कंपनी की प्लाटून के साथ 13 मई की सुबह डेल्टा प्लाटून की स्थिति को मजबूत करने के लिए पहुंचे। 15 मई को 1/11 गढ़वाल राइफल्स ने उपलब्ध आड़ का सामरिक लाभ उठाते हुए लक्ष्य पर एक और हमला किया। हमले के दौरान राइफलमैन सुनील जंग लेफ्टिनेंट रॉय के साथ अपनी दाहिनी ओर दुश्मन सैनिकों से मुकाबला कर रहे थे। वे रेडियो ऑपरेटर के साथ-साथ दुश्मन पर गोलीबारी करने के दोहरे कार्य में लगे हुए थे। इसी भीषण गोलीबारी के दौरान राइफलमैन सुनील जंग को गोली लग गई और वे गिर पड़े। बाद में वह वीरगति को प्राप्त हो गए।
राइफलमैन सुनील जंग महत का जन्म 13 नवंबर 1978 को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में श्रीमती बीना महत और सूबेदार नर नारायण जंग महत के यहाँ हुआ था | घर में सैनिक वातावरण होने के कारण वह बचपन से ही वर्दी के प्रति आकृष्ट थे | उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा अपने पिताजी के साथ रहते हुए विभिन्न स्कूलों से पूरी की और उसके पश्चात सेना में भर्ती हो गए। प्रशिक्षण के पश्चात उनकी तैनाती 11 गोरखा राइफल्स की 1/11 गढ़वाल राइफल्स बटालियन में हुई | राइफलमैन सुनील जंग महत के दादा मेजर नकुल जंग महत और पिता सूबेदार नर नारायण जंग ने भी सेना में सेवा दे चुके हैं |
मई 1999 में जब राइफलमैन सुनील जंग की यूनिट सियाचिन में अपने फील्ड लोकेशन से पुणे जाने की तैयारी कर रही थी, तब नियंत्रण रेखा पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी | जिसके परिणामस्वरूप 09 मई 1999 को 1/11 जीआर बटालियन को बटालिक सेक्टर में तैनात किया गया। राइफलमैन सुनील जंग महत के परिवार में उनके पिता सूबेदार नर नारायण जंग महत , माता श्रीमती बीना महत और बहनें सुनीता और श्रीजना हैं। बड़ी बहन सुनीता की शादी हो चुकी है | वर्तमान समय में इनका परिवार लखनऊ में रह रहा है |
– हरी राम यादव
सूबेदार मेजर (आनरेरी)
7087815074




