कर्नल (तब लेफ्टिनेंट) पंकज कुमार “कीर्ति चक्र”

कर्नल (तब लेफ्टिनेंट) पंकज कुमार “कीर्ति चक्र”
समाज में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो अपनी दृढ इच्छा शक्ति, कठिन परिश्रम और साहस से ऐसा कुछ कर जाते हैं जो एक इतिहास बन जाता है और यही इतिहास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता है। नयी पीढ़ी इसी मार्ग पर चलकर कुछ नया करने के लिए सोचती है । यही इतिहास युवा पीढ़ी को पाठ्यक्रम में पढाया जाता है।, लोग इसी पर शोध करते हैं और वह शोध फिर एक इतिहास बन जाता है। इतिहास और वर्तमान का यह क्रम चलता रहता है। आज हम एक ऐसे यौद्धा का इतिहास पढेंगे जिसका साहस और पराक्रम वर्तमान की नींव है ।
7/11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट पंकज कुमार को हिलागुरी छापरी क्षेत्र एक खोजी मिशन पर भेजा गया था | उनके इस दल में एक जूनियर कमीशन अफसर और 15 जवान शामिल थे। यह दल 05 अप्रैल 2007 को सुबह 0100 बजे अपने मिशन पर निकल पड़ा और आतंकवादियों की खोज में लगातार चलता रहा |
10 अप्रैल 2007 का दिन था और समय लगभग 05 बजे, 30 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर बाद जब लेफ्टिनेंट पंकज कुमार, नायक रमेश कुमार तमांग, लांस नायक फुरबा शेरिंग शेरपा और सिपाही रिंकू फुकन के साथ टिक्लिबाम में तलाशी के लिए पहली झोपड़ी की ओर बढ़ ही रहे थे, उसी समय दो आतंकवादी बाहर निकले और फायरिंग शुरू कर दी। लेफ्टीनेंट पंकज कुमार ने तुरंत आड़ ली और उनके ऊपर फायरिंग शुरू कर दी। आतंकवादी घने जंगल में पेड़ों के पीछे छुप गये और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी जिससे इस दल का आगे बढ़ना रूक गया। लेफ्टिनेंट पंकज कुमार ने नायक रमेश तमांग को आतंकवादियों को व्यस्त रखने का निर्देश दिया और अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना घनी झाड़ियों के बीच से रेंगते हुए आतंकवादी के पीछे पहुंच गये और उन्होंने आतंकवादी के ऊपर गोलियों की बौछार कर दी।
इस हमले में एक आतंकवादी मारा गया। इसी बीच दूसरा आतंकवादी घने जंगल में छिप गया। लेफ्टीनेंट पंकज कुमार उसके पीछे लग गये। घने जंगल में छिपे आतंकवादी ने उनके ऊपर ग्रेनेड फेंक कर, सुरक्षा घेरा तोड़कर भागना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने नजदीक ग्रेनेड के फटने की चिन्ता किए बिना दूसरे आतंकवादी को मार गिराया। इसी बीच अन्य झोपड़ियों में छिपे दूसरे आतंकवादियों ने गोलियां बरसाना शुरू कर दिया और आसपास के जंगल की ओर भागने लगे। लेफ्टिनेंट पंकज कुमार ने तुरंत स्थिति को संभाला और आतंकवादियों के ऊपर भीषण गोलीबारी की। जिससे भागने वाले सभी आतंकवादी मौके पर ही ढेर हो गये। पूरे ऑपरेशन के दौरान जिसमें आठ आतंकवादी मारे गए थे, लेफ्टिनेंट पंकज कुमार ने अपनी टीम का नेतृत्व किया। भारी गोलाबारी के बीच उनके अनुकरणीय साहस, नेतृत्व क्षमता और कुशलता के बल पर बिना किसी क्षति के आठ कट्टर आतंकवादियों को मार गिराया।
उनके इस साहसिक प्रदर्शन और नेतृत्व कौशल के लिए उन्हें शांतिकाल के दूसरे सबसे बड़े सम्मान “कीर्ति चक्र” से सम्मानित किया गया। बाद में इन्हें सेना शिक्षा कोर से स्थायी रूप से गोरखा राइफल्स में तैनात कर दिया गया।
लेफ्टीनेंट पंकज कुमार का जन्म 11 मार्च 1978 को जनपद बागपत के गांव कंकड़ी पुर में श्रीमती केलावती सिंह तथा श्री सत्यपाल सिंह के यहां हुआ था। इन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय, जामनगर, हाईस्कूल तथा इण्टरमीडियट की शिक्षा केन्द्रीय विद्यालय, बेगमपेट, सिकन्दराबाद और स्नातक की शिक्षा बेस्ले ब्वायज डिग्री कालेज, सिकन्दराबाद से पूरी की। आइ टी एस गाजियाबाद से मास्टर आफ कंप्यूटर एप्लीकेशन की डिग्री हासिल किया। इन्होंने 11 जून 2005 को भारतीय सेना की सेना शिक्षा कोर में कमीशन लिया और 2 वर्षों की अस्थायी तैनाती के लिए 7/11 गोरखा राइफल्स में पदस्थ हुए।
– हरी राम यादव
सूबेदार मेजर (आनरेरी)
7087815074




