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नायक नबाब सिंह तोमर “कीर्ति चक्र” (मरणोपरांत)

नायक नबाब सिंह तोमर “कीर्ति चक्र” (मरणोपरांत)
पौराणिक व्याघ्रप्रस्थ के नाम में जाना जाने वाला उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत ने शौर्य और पराक्रम के मामले में अपने पौराणिक नाम को हमेशा चरितार्थ किया है । यहाँ के लोगों पर इसके पश्चिम में अविरल बहती यमुना नदी के पानी की रवानी हमेशा रही है । यमुना के पानी की रवानी की तरह ही यहाँ के लोग फुर्तीले, जोशीले और जाबांज रहे है । चाहे वह द्वितीय विश्व युद्ध रहा हो या हमारे देश द्वारा लडे गए अन्य युद्ध , इस जनपद के वीरों ने हमेशा अपनी हिम्मत का लोहा मनवाया है । आज उसी बागपत के एक जांबाज यौद्धा का वीरगति दिवस है जिन्होंने 1993 में वीरता की एक ऐसी लकीर खींची जो कि अमिट है ।
सन् 1993 में 11 राजपूताना राइफल्स जम्मू कश्मीर के बड़गांव जिले में तैनात थी । 09 अप्रैल 1993 को इस बटालियन को एक सटीक सूचना मिली कि पोहार गांव में आतंकवादी छुपे हुए हैं। राजपूताना राइफल्स की इस बटालियन की सभी कंपनियों और कमांडो प्लाटून ने गांव को चारों ओर से घेर लिया। दोपहर के लगभग 02:00 बजे छुपे हुए दो आतंकवादियों ने कमांडो प्लाटून पर भयानक गोलीबारी करना शुरू कर दिया। जबाबी कार्यवाही के लिए नायक नवाब सिंह तोमर ने तत्काल निर्णय लिया और आतंकवादियों पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। नायक नवाब सिंह तोमर की जबाबी कार्यवाही से चारों तरफ से घिरे आतंकवादी घबरा गये और घेरा तोड़कर भागने का प्रयास करने लगे। नायक तोमर ने अपने दल को पुनः संयोजित करके तैनात किया। इसी बीच चल रही भीषण गोलीबारी में उन्होंने एक आतंकवादी को मार गिराया। इसी दौरान एक गोली उनके दाहिने हाथ में आ लगी। आतंकवादियों ने घेरे को तोड़कर भागने का प्रयास तेज कर दिया और अंधाधुंध गोलीबारी करने लगे। नायक नवाब सिंह घायल होने के बावजूद लगातार आतंकवादियों का पीछा कर रहे थे। दोनों और से चल रही नजदीकी लड़ाई में नायक नवाब सिंह के पेट में अब तक कई गोलियां लग चुकी थीं। उन्होंने धैर्य से काम लिया और आतंकवादियों पर काल बनकर टूट पड़े और दो और आतंकवादियों को मार गिराया।
इस कार्यवाही में नायक नबाब सिंह तोमर ने अदम्य साहस, धैर्य, वीरता और कुशल नेतृत्व का परिचय देते हुए कुल तीन आतंकवादियों को मार गिराया। उनके साहस, वीरता और कर्त्तव्यपरायणता के लिए उन्हें मरणोपरांत शांतिकाल के दूसरे बड़े सम्मान “कीर्ति चक्र” से सम्मानित किया गया।
नायक नवाब सिंह तोमर का जन्म 07 जुलाई 1960 को जनपद मेरठ की तहसील बागपत के गांव ढिकाना में श्रीमती फूलो देवी तथा श्री अलम सिंह के यहां हुआ था। इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा प्राइमरी पाठशाला ढिकाना से पूरी की और उच्च शिक्षा के लिए जाट कालेज बडौत में एडमीशन लिया और वहां से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्राप्त की | 17 अक्टूबर 1979 को वह भारतीय सेना की राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए और प्रशिक्षण के उपरान्त 11 राजपूताना राइफल्स में तैनात हुए।
33 साल बीत जाने के बाद भी नायक नवाब सिंह तोमर के वीरता और बलिदान की याद में बागपत जिले में या उनके गाँव में एक ईट तक नहीं लगी है। यह अपने गांव के आसपास के लोगों में अनजान बने हुए हैं। आज की युवा पीढ़ी इस बहादुर यौद्धा की वीरता से अनभिज्ञ है । इनके बेटे विक्की तोमर का कहना है कि उनके गाँव में स्थित स्कूल का नामकरण उनके पिता जी के नाम पर कर दिया जाए या गाँव में आने वाली सडक पर एक शौर्य द्वार बनाकर उस सड़क का नामकरण कीर्ति चक्र विजेता नायक नवाब सिंह तोमर के नाम पर कर दिया जाए तो यह एक प्रेरणा स्रोत और उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
– हरी राम यादव
सूबेदार मेजर (आनरेरी)
7087815074




