वीरता, पराक्रम, शौर्य और साहस का दूसरा नाम महाराणा प्रताप

S4 न्यूज़ नेटवर्क संवाददाता
वीरता, पराक्रम, शौर्य और साहस का दूसरा नाम महाराणा प्रताप है। जो समाज अपने शूरवीरों का सम्मान नही करता, उस समाज से शूरवीर पैदा होना बंद हो जाते हैं। पूर्व सी डी ओ के द्वारा तीर्थराज चित्तौड़ की पवित्र भूमि की मिट्टी इंटर कॉलेज गौरा को सौंपी गई।

मंगलवार को इंटर कॉलेज गौरा में शूरवीर महाराणा प्रताप सिंह के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्य विकास अधिकारी विजय कुमार सिंह ने महाराणा प्रताप के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला और कहा कि जिन समाजों में शूरवीरों का सम्मान बंद हो जाता है, उन समाजों में शूरवीरों का उत्पन्न होना बंद हो जाता है। उन्होंने श्याम नारायण पांडेय की पंक्तियों को दोहराते हुए कहा कि मुझे ना जाना गंगा सागर, मुझे ना रामेश्वर काशी, तीर्थराज चित्तौड़ देखने को मेरी आंखें प्यासी। इसी के साथ उन्होंने विदेशी लेखक ह्वीलर, बर्नियर, कर्नल वॉल्टर आदि का उद्धरण देते हुए कहा कि राजपूत जाति भारतवर्ष में सबसे कुलीन और स्वाभिमानी है। संसार में और कोई ऐसी जाति शायद हो जिसकी उत्पत्ति इतनी पुरानी और शुद्ध हो। महाराणा प्रताप क्षत्रिय जाति के वंशज हैं। उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में मुगल बादशाह अकबर की सेना का मुकाबला डटकर किया था। महाराणा प्रताप कभी भी मुगल सेना के सामने नतमस्तक नही हुए।
इस अवसर पर उन्होंने महाराणा प्रताप सिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किया तथा विद्यालय को पीपल का पौधा सुप्रेम भेंट किया। वो तीर्थराज चित्तौड़ की पवित्र भूमि की मिट्टी अपने साथ लाए थे। उस मिट्टी को विद्यालय को भेंट किया। इस गोष्ठी का संचालन उपप्रधानाचार्य डॉ सुनील दत्त ने किया। गोष्ठी में उपस्थित लोगों का स्वागत शिक्षक कमीक्षा प्रताप सिंह ने किया।
यहां पर छात्र-छात्राओं के साथ सभाजीत यादव, प्रेमचंद भारती, लेफ्टिनेंट राजेंद्र प्रताप सिंह, कृपा शंकर मौर्य, दिनेश चंद्र वर्मा, मुन्ना लाल, अशोक कुमार, ज्ञान बहादुर, लवलेश कुमार, राजकुमार, अनिल कुमार सिंह, राजेश मिश्रा, सुनील सिंह, प्रदीप पांडेय, देवेंद्र सिंह, संजीव यादव, अरुण सिंह, अशोक सिंह, अमरेंद्र बहादुर सिंह, सुंदरलाल, भूपेंद्र सिंह, निर्भय दास, सुशील बाजपेई, जितेंद्र कुमार यादव, हरी प्रताप पाल, धीरेंद्र यादव आदि शिक्षक शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।




