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हल्द्वानी, नैनीताल के कालाढूंगी चौक पर महावीर चक्र विजेता मेजर राजेश अधिकारी का बनेगा शहीद स्मारक

 

S4 न्यूज़ नेटवर्क संवाददाता

मेजर राजेश सिंह अधिकारी का जन्म 25 दिसंबर 1970 को उत्तराखंड राज्य के नैनीताल के तल्लीताल में श्रीमती मालती अधिकारी.और श्री के.एस. अधिकारी के यहां हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट जोसेफ कॉलेज, नैनीताल से, माध्यमिक शिक्षा सरकारी इंटर कॉलेज से और स्नातक की उपाधि कुमाऊं विश्वविद्यालय से प्राप्त की। इसके पश्चात उनका चयन भारतीय सैन्य अकादमी के लिए हो गया। 11 दिसंबर 1993 को 23 वर्ष की आयु में उन्हें 2 मैक इन्फैंट्री बटालियन में कमीशन मिला। विभिन्न जगहों पर 05 वर्षों तक सेवा देने के बाद मेजर अधिकारी का विवाह 1998 में किरण नेगी से हुआ ।

सन 1999 में जब पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा जमा लिया था तब उनको खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ने आपरेशन विजय चलाया। 30 मई 1999 को तोलोलिंग चोटी पर कब्ज़ा करने के लिए 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन में तैनात मेजर राजेश सिंह अधिकारी को दुश्मन की मज़बूत किलेबंदी वाली अग्रिम चौकी पर कब्ज़ा करके शुरुआती मोर्चा सुरक्षित करने का काम सौंपा गया था। यह चौकी लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुर्गम पहाड़ी इलाके में थी और बर्फ से ढकी हुई थी। उस रात वह और ग्रेनेडियर्स बटालियन के 10 जवानों की एक टीम किलेबंद लक्ष्य की ओर चढ़ाई करने लगी। मेजर अधिकारी एक बंकर पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रही 10-10 जवानों की तीन टीमों में से बीच वाली टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे। मेजर अधिकारी इस हमले का नेतृत्व कर रहे थे। उनके दल पर दो बंकरों से मशीनगनों से गोलीबारी की जा रही थी। उन्होंने तुरंत रॉकेट लॉन्चर टुकड़ी को बंकर पर हमला करने का निर्देश दिया और बिना इंतजार किए बंकर में घुस गए और आमने-सामने की लड़ाई में दो घुसपैठियों को मार गिराया।

इसके बाद उन्होंने अपनी मीडियम मशीन गन (एमएमजी) टुकड़ी को एक चट्टान के पीछे मोर्चा संभालने और दुश्मन से मुकाबला करने का आदेश दिया। हमलावर दल धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, मेजर अधिकारी अपने सैनिकों को निर्देश देते रहे और गोलीबारी का निर्देशन करते रहे। उन्होंने दूसरे बंकर पर धावा बोला तथा दूसरे बंकर पर कब्जा कर लिया, जिससे बाद में प्वाइंट 4590 पर कब्जा करने में मदद मिली। मेजर अधिकारी ने घुसपैठियों को भारी नुकसान पहुंचाया और उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया, जिसके बाद वे अपनी चोटों के कारण वीरगति को प्राप्त हो गए।

तोलोलिंग की लड़ाई सबसे महत्वपूर्ण लड़ाइयों में से एक थी जिसमें मेजर अधिकारी ने वीरतापूर्वक लड़ाई लड़ी और अपने प्राणों की आहुति देकर लक्ष्य को प्राप्त किया। मेजर अधिकारी एक वीर सैनिक और दृढ़ निश्चयी अधिकारी थे, जिन्होंने आगे बढ़कर नेतृत्व किया और अपने कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

मेजर राजेश सिंह अधिकारी को उनकी असाधारण वीरता, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार, “महावीर चक्र” से सम्मानित किया गया।

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