Uncategorized

महकें बन गणतंत्र की क्यारी

महकें बन गणतंत्र की क्यारी

तंत्र हमारा तन्मयता से सुने,
जन गण के मन की पुकार।
हर दीन हीन गरीब को मिले,
उसका मौलिक अधिकार।
उसका मौलिक अधिकार,
धार नीर की सबके घर हो।
भोजन भवन की सुविधा से,
हर भारतवासी का मन तर हो ।
मिले सुविधा सबको पढ़ने की,
अवसर सबको मिले समान।
सब बीमारों को मिले दवाई,
तभी बढ़ेगा गणतंत्र का मान ।।

बोलने की बनी रहे आजादी,
इस पर न कोई पहरा हो ।
सहमति असहमति सुनने में,
देश का कोई तंत्र न बहरा हो।
देश का कोई तंत्र न बहरा हो,
अपनी हद में सब काम करें।
भारत का भाग्य निर्माता बन,
हाथ बटाएं और नाम करें।
सबको सबका हक मिले ‘हरी’,
हुकूमत में हो सबकी भागीदारी।
सब अपने को कहें भारतीय,
महकें बन गणतंत्र की क्यारी।।

– हरी राम यादव
सूबेदार मेजर (आनरेरी)
बनघुसरा, अयोध्या

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!