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लखनऊ में आर्मी एयर डिफेंस कोर का मनाया गया 33वां स्थापना दिवस

 

लखनऊ में आर्मी एयर डिफेंस कोर का मनाया गया 33वां स्थापना दिवस

S4 न्यूज़ नेटवर्क संवाददाता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कोर ऑफ आर्मी एयर डिफेंस (ए ए डी) का 33वां स्थापना दिवस “गगन रक्षक समूह लखनऊ” के बैनर तले बड़ी धूमधाम से मनाया गया । इस समारोह में लखनऊ में निवास कर रहे सेवानिवृत्त सैनिकों के अलावा आगरा, अलीगढ, फर्रुखाबाद, कानपुर, उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, सीतापुर, प्रतापगढ़ और अयोध्या के भी इस कोर के सेवानिवृत्त

सैनिकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ – रायबरेली रोड पर स्थित साईं पैराडाइज होटल में किया गया । इस अवसर पर सेवानिवृत्त सैनिकों ने अपनी कोर के गौरवशाली इतिहास और अपनी कोर के बेहतर भविष्य की कामना के साथ अपनी कोर के युद्ध घोष ‘आकाशे शत्रून जहि’ के नारे के साथ राजधानी लखनऊ के आकाश को गुंजायमान कर दिया।

इस अवसर पर आर्मी एयर डिफेंस कोर की विभिन्न यूनिटों के लगभग 90 सेवानिवृत्त सैनिकों ने इस समारोह में शिरकत किया। इस कार्यक्रम की शुरुआत कोर आफ आर्मी एयर डिफेंस के कोर गीत के साथ हुई, आये हुए सैनिकों को केंद्रीय सैनिक बोर्ड, राज्य सैनिक बोर्ड, उत्तर प्रदेश सैनिक पुनर्वास निधि, उत्तर प्रदेश पुलिस एवं आर्म्ड फोर्सेज सहायता संस्थान और उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम द्वारा सेवानिवृत्त सैनिकों, वीर नारियों और वीरता पदक विजेताओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के साथ साथ गांवों में राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गयी। समारोह में सम्मिलित सभी सैनिकों ने अपने सेवानिवृत्ति के बाद के अनुभवों को मंच पर साझा किया और अगले वर्ष इस समारोह को विस्तृत रुप से मनाए जाने का निर्णय लिया।

आपको बताते चलें कि यह सेना की वह इकाई है जिसकी तोपों और रडार की छाया को देखकर दुश्मन देश की वायु सेना थर्राती है। इस कोर के पास जमीन और हवा में दुश्मन को धूल चटाने की विशाल क्षमता है। इसकी गगनभेदी तोपों, मिसाइलों और रडार सिस्टम से कोई भी हवा में उड़ने वाली प्रणाली बच नहीं सकती। इसी के बल पर इसने अब तक लड़े गये युद्धों विशेषकर 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी वायु सेना की कमर तोड़ दी थी । अभी हाल में हुए ऑपरेशन सिन्दूर में इस कोर के बहादुर तोपचियों ने पाकिस्तान की मिसाइल और ड्रोन प्रणाली को अपनी सीमा में घुसते ही घराशायी कर दिया। ऑपरेशन सिन्दूर में इस कोर के सैनिकों को उनकी वीरता के लिए 02 सेना मेडल, 02 युद्ध सेवा मेडल, 01 मेंशन इन डिस्पैच और 37 सेना प्रमुख (सीओएएस) प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गए।

 

हमारे देश में आर्मी एयर डिफेंस की शुरुआत 1939 में हुई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी हवाई हमलों से निपटने के लिए एयर डिफेंस यूनिट का गठन किया गया था। सही मायने में कोर ऑफ आर्मी एयर डिफेंस की स्थापना 15 सितंबर 1940 को शुरू हुई, जब नंबर 1 एंटी-एयरक्राफ्ट ट्रेनिंग सेंटर ने कोलाबा (मुंबई) में अपनी स्थापना शुरू की और यह स्थापना जनवरी 1941 में कराची में पूरी हुई। स्वतंत्रता के बाद कोर ऑफ आर्मी एयर डिफेंस, रेजिमेंट ऑफ़ आर्टिलरी का हिस्सा बनी रही और 10 जनवरी 1994 को एक अलग कोर के रूप में विभाजित हो गयी।

 

कोर ऑफ आर्मी एयर डिफेंस का गौरवशाली इतिहास रहा है । इस कोर को अब तक लड़े गये विभिन्न युद्धों में 04 युद्ध सम्मान और इस कोर के सैनिकों को उनकी वीरता और अदम्य साहस के लिए 04 मिलिट्री क्रॉस, 01 ब्रिटिश साम्राज्य पदक, 07 भारतीय विशिष्ट सेवा पदक, 02 आर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर, 20 वीर चक्र, 02 अशोक चक्र I & II , 02 कीर्ति चक्र, 10 शौर्य चक्र, 120 सेना मेडल और 56 मेंशन इन डिस्पैच से अलंकृत किया गया है।

इसके गौरवशाली इतिहास, देश की रक्षा में योगदान और उल्लेखनीय सेवाओं को देखते हुए सन् 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 28 सितंबर को गोपालपुर में एक स्वतंत्र इकाई के रूप में 25 साल पूरे होने पर राष्ट्रपति के ध्वज से सम्मानित किया।

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