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वीरता दिवस पर विशेष

 

S4 न्यूज़ नेटवर्क संवाददाता

*विंग कमांडर हर्सेर्न सिंह गिल**

वायु सेना मेडल, वीर चक्र*

 

हम प्रतिवर्ष 1971 में पाकिस्तान के विरुद्ध लड़े गए युद्ध का विजय दिवस मनाते हैं, हमें मनाना भी चाहिए आखिर में हमारे देश के बहादुर सैनिकों ने 13 दिन में पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बाँट दिया था और उसके नागरिकों और सैनिकों को मिलकर 93,000 लोगों को युद्ध बंदी बनाया था , जो कि विश्व के सैन्य इतिहास में एक अपूर्व उदाहरण है । इतने कम समय में कोई भी देश युद्ध नहीं जीत पाया है । यह सेना और देश के तत्कालीन नेतृत्व की इच्छाशक्ति की बहुत बड़ी जीत है, लेकिन इस जीत के जश्न में हमने अपने कुछ बहादुर सैनिकों को भुला दिया जो दुश्मन से लड़ते लड़ते उसकी भूमि में पहुँच गए और युद्ध बंदी बना लिए गये, जो कि मिसिंग 54 के नाम से जाने जाते हैं । आज इसी मिसिंग 54 की सूची के एक ऐसे ही वीर योद्धा विंग कमांडर हर्सेर्न सिंह गिल का वीरता दिवस है, जिन्हें उनकी वीरता के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया है ।

 

दिसंबर 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के दौरान विंग कमांडर गिल पश्चिमी क्षेत्र में फाइटर विमान मिग-21 आधारित 47 स्क्वॉड्रन के कमांडिंग ऑफिसर थे । 03 दिसंबर 1971 को जब पाकिस्तान वायु सेना ने भारतीय वायु सेना के विभिन्न एयर बेसों पर हमला किया, तो 47 स्क्वॉड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में विंग कमांडर गिल ने एयर ऑपरेशनों के कई मिशनों का नेतृत्व किया और अपने पायलटों को प्रेरित किया। उनकी स्क्वॉड्रन ने 11 दिसंबर 1971 को जामनगर के ऊपर दुश्मन के एक एफ -104 विमान को मार गिराया ।

 

12 दिसंबर 1971 को विंग कमांडर गिल ने पाकिस्तान में बदीन सिग्नल्स यूनिट कॉम्प्लेक्स पर एक स्ट्राइक मिशन को अंजाम दिया। यह काम्प्लेक्स कंक्रीट की काफी मोटी दीवारों, छतों से बनाया गया था और विमान रोधी तोपों से सुरक्षित किया गया था। इस मिशन में उन्हें पाकिस्तान की इन्हीं विमान रोधी तोपों के गोलों का सामना करना पड़ा। 13 दिसंबर 1971 को उन्होंने उसी सिग्नल्स यूनिट कॉम्प्लेक्स पर एक और स्ट्राइक मिशन का नेतृत्व किया। इस लक्ष्य पर आक्रमण करना बहुत बड़ा जोखिम था। बड़े जोखिम के बावजूद उन्होंने असाधारण साहस और युद्ध कौशल का प्रदर्शन करते हुए हमले को अंजाम दिया। इसी हमले के दौरान उनका विमान दुश्मन की विमान रोधी तोप की फायरिंग की चपेट में आ गया और ध्वस्त हो गया। ऐसा कहा जाता है कि विंग कमांडर गिल ने छलांग लगा दी और उन्हें पकड़ लिया गया और युद्धबंदी बना लिया गया। उसी दिन पाकिस्तान के हैदराबाद रेडियो पर उनके नाम की घोषणा युद्ध बंदी के रूप में की गई थी । सरकार द्वारा उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। उनका नाम आज भी रहस्य बना हुआ है, उनका नाम आज भी मिसिंग 54 की सूची में दर्ज है।

 

विंग कमांडर हर्सेर्न सिंह गिल का जन्म 06 जुलाई 1933 को अविभाजित भारत के नौशेरा (अब पाकिस्तान) में मेजर पूरन सिंह गिल के यहाँ हुआ था। मेजर पूरन सिंह गिल सेना चिकित्सा कोर के अधिकारी थे । बंटवारे के बाद इनका परिवार उत्तर प्रदेश के जनपद बरेली में आकर बस गया था। इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली से पूरी की और 16 जनवरी 1954 को भारतीय वायु सेना में कमीशन लिया । इनके परिवार में इनके माता पिता , भाई , पत्नी श्रीमती बसंती और दो बच्चे थे। उनकी पत्नी ने अपने पति का इन्तजार करते करते कैंसर से लड़ते हुए दम तोड़ दिया , बेटे ने भी इस पीड़ा में आत्महत्या कर ली और उनकी बेटी का कोई पता नहीं है। उनके भाई गुरबीर सिंह गिल आज भी अपने भाई के वापस आने की उम्मीद में हैं। विंग कमांडर हर्सेर्न सिंह गिल के साहस और वीरता के सम्मान में फरवरी 2020 में 47 स्कवाड्रन एयर फोर्स आदमपुर में यूनिट की डायमंड जुबली के अवसर पर एक हॉल का नाम “एच एस गिल मोटिवेशन हॉल” रखा गया । इस मोटीवेशनल हाल का उद्घाटन उनके भाई श्री गुरबीर सिंह गिल द्वारा किया गया ।

 

विजय दिवस के शोर में हम अपने इन बहादुर योद्धा के परिजनों के दर्द को भूल गए। हमें इनके दर्द का एहसास भी नहीं है । हम लोग बस हर साल खूब शोर शराबे में विजय दिवस मनाते हैं और गौरव गान करते हैं क्योंकि यह हमारे अपने घर के नहीं हैं। सरकार ने अब तक इस दिशा में जो भी प्रयास किए हैं वह नाकाफी हैं क्योंकि 54 साल बीत जाने के बाद भी यह आज भी मिसिंग 54 की सूची में ही हैं । आज भी परिवार के बचे हुए लोग इस आशा में है की शायद कोई चमत्कार हो जाए और विंग कमांडर हर्सेर्न सिंह गिल वापस आ जाएं ।

 

हरी राम यादव

सूबेदार मेजर (आनरेरी)

7087815074

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