टॉप न्यूज़देशयूपीलोकल न्यूज़

वीरगति दिवस पर विशेष

 

*दफेदार हरवीर सिंह*

*वीर चक्र (मरणोपरान्त)*

 

भारतीय सेना ने सन् 1971 में हुए भारत पाक युध्द में बड़ी वीरता से युद्ध लड़ा और एक इतिहास लिख दिया , एक ऐसा इतिहास जो न तो पहले लिखा गया और न ही भविष्य में लिखे जाने की संभावना है । यह युद्ध अब तक के सैन्य इतिहास में सबसे कम समय में लड़ा गया निर्णायक युद्ध है और इतने युद्धबंदी किसी भी युद्ध में नहीं बनाये गए । इस युद्ध में राजस्थान के लोंगेवाला में भारतीय सेना के वीरों द्वारा लड़ा गया युद्ध और अभूतपूर्व है । हमारे देश के मुट्ठी भर सैनिकों ने पाकिस्तान की रेजिमेंट को तबाह कर डाला था।

 

1971 के भारत पाक युध्द में 20 लांसर पश्चिमी मोर्चे पर राजस्थान के लोंगेवाला में तैनात थी। दफेदार हरवीर सिंह अपनी यूनिट के ट्रुप के आगे वाले टैंक के कमाण्डर थे। जिसे शत्रु के एक बड़े आर्मर्ड सैनिक हमले को विफल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दफेदार हरवीर सिंह अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना पाकिस्तानी टैंकों से भिड़ गये। उन्होंने दुश्मन के टैंकों पर भारी और कारगर गोलाबारी की जिससे शत्रु के दो टैंक नष्ट हो गये। दुश्मन की सेना में इनके भीषण आक्रमण से घबराहट फ़ैल गयी । यह निडर होकर अपने टैंक के साथ आगे बढ़ते जा रहे थे, इसी बीच इनके टैंक पर दुश्मन का एक गोला आकर गिरा और यह वीरगति को प्राप्त हो गये। लोंगेवाला के इस प्रसिद्ध युद्ध में दफेदार हरवीर सिंह ने अपूर्व साहस और वीरता का परिचय दिया। इनके साहस और वीरता लिए इन्हें 05 दिसम्बर 1971 को मरणोपरान्त वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

 

दफेदार हरवीर सिंह का जन्म 06 जुलाई 1937 को जनपद बुलन्दशहर के गांव रिझौड़ा में श्रीमती रजवंती देवी और श्री सम्पूर्ण सिंह के यहाँ हुआ था। इन्होने अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा अपने पडोसी गांव रहेमापुर चावली तथा उच्च शिक्षा जटपुरा मुनीम पुर इंटर कालेज, बुलंदशहर से पूरी की और 03 फरवरी 1957 को भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर में भर्ती हो गए । प्रशिक्षण के बाद वह 20 लांसर में तैनात हुए। इनका विवाह श्रीमती जगवीरी देवी से हुआ । दफेदार हरवीर सिंह के परिवार में इनके दो बच्चे – पुत्री आशा और पुत्र सतीश पाल है। पुत्री आशा की शादी हो चुकी है। दफेदार हरवीर सिंह के माता पिता का निधन कई साल पहले हो चुका है तथा इनकी पत्नी श्रीमती जगवीरी देवी का निधन 03 वर्ष पहले हो गया है।

 

बुलंदशहर के स्थानीय प्रशासन ने दफेदार हरवीर सिंह की वीरता और बलिदान को सजोये रखने और उनकी वीरगाथा को अगली पीढ़ी तक ले जाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है । प्रशासन की उदासीनता से परेशान होकर उनकी वीरांगना श्रीमती जगवीरी देवी ने अपने पति की प्रतिमा का निर्माण करवाया और अपनी जमीन में लगवाया है, । उनके पुत्र सतीश पाल का कहना है कि जहाँ पर उनके पिताजी की प्रतिमा लगी हुई है वहां से उनके घर तक आने वाली सड़क को पक्की बनवाकर उसका का नामकरण हमारे पिताजी के नाम पर करवा दिया जाय और गांव में एक शौर्य द्वार बनवा दिया जाए तो यह उनकी वीरता का सम्मान होगा। वह आगे कहते हैं कि हमारे गांव की वर्तमान युवा पीढ़ी यह जानती ही नहीं कि हमारे गांव में किसी व्यक्ति को युद्ध काल का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान वीर चक्र मिला है।

 

हरी राम यादव

सूबेदार मेजर (आनरेरी)

लेखक

अयोध्या/लखनऊ

7087815074

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!