वीरगति दिवस विशेष

सूबेदार सत्य प्रकाश
शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू कश्मीर को आतंकवाद ने तहस नहस कर दिया है । चाहे 1947 में कबाइलियों के वेष में आये दहशतगर्द रहे हों या 1965, 1971 या 1999 में दहशतगर्दी में शामिल पाकिस्तान के सैनिक रहे हो, सब से, यहाँ के निवासियों और सेना ने वीरता पूर्वक मुकाबला किया। अब तक इस भूभाग की रक्षा में इतने सैनिको ने अपना बलिदान दिया है कि यहाँ की जमीन का कण कण रक्तरंजित है, हर कण में वीरगति प्राप्त सैनिकों की सांसों की आहट सुनाई पड़ती है। और यह आहट उनके परिजनों और देशवासियों को उद्वेलित करती हैं ।
सन 2001 में 26 राष्ट्रीय राइफल्स जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में तैनात थी। 18 अक्टूबर 2001 को गंडोह तहसील में एक गांव से भागे हुए आतंकवादियों को खत्म करने के लिए एक ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन में सूबेदार सत्य प्रकाश अपने दल का नेतृत्व कर रहे थे। इनके दल ने काको नाला की तरफ भागे आतंकवादियों की तलाश शुरू की। सेना द्वारा चलाये जा रहे खोजी अभियान की भनक जैसे ही आतंकवादियों को लगी उन्होंने सूबेदार सत्य प्रकाश के दल पर स्वचालित हथियारों से भारी गोलीबारी करना शुरू कर दिया जिसमें सूबेदार सत्य प्रकाश के माथे पर गोली लग गयी , वह घायल हो गए । घायल होने के बावजूद उन्होंने अपने दल का नेतृत्व जरी रखा, वह रेंगते हुए आगे बढे और प्रभावी फायरिंग पोजीशन तक पहुंच गए । फायरिंग की जद में आने पर उन्होंने फायरिंग करने वाले आतंकवादियों पर हमला बोल दिया और अपनी ए के – 47 राइफल से फायरिंग का करारा जबाब देना शुरू कर दिया और उन्होंने आतंकवादियों पर ग्रेनेड भी फेंके । उन्होंने खूंखार आतंकवादियों को मौत के घाट उतर दिया । चोट गहरी होने और ज्यादा रक्तस्राव के कारण वह लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए।
सूबेदार सत्य प्रकाश का जन्म 15 जून 1956 को जनपद मैनपुरी के ग्राम प्रहलाद पुर में श्रीमती मशीला देवी और श्री जयवीर सिंह यादव के यहां हुआ था। इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गिरधारी इन्टर कालेज, सिरसागंज, फिरोजाबाद से पूरी की। 04 दिसम्बर 1975 को यह भारतीय सेना की कुमाऊँ रेजिमेंट में भर्ती हो गये और प्रशिक्षण पूरा होने के पश्चात 18 कुमांऊँ रेजिमेंट में पदस्थ हुए। बाद में इनकी अस्थायी तैनाती 26 राष्ट्रीय राइफल्स में हुई।
सूबेदार सत्य प्रकाश ने अनुकरणीय साहस, व्यक्तिगत वीरता और सर्वोत्कृष्ट नेतृत्व का प्रदर्शन किया और आतंकवादियों से लड़ते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। 18 अक्टूबर 2001 को उनके अनुकरणीय साहस और वीरता के लिए उन्हें मरणोपरान्त “शौर्य चक्र” से सम्मानित किया गया। सूबेदार सत्य प्रकाश की वीरांगना श्रीमती नारायन श्री ने अपने पति की याद में अपने गांव में एक प्रतिमा स्थापित की है।
– हरी राम यादव
सूबेदार मेजर (आनरेरी)
7087815074




